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नाराजगी दिल्ली पुलिस के प्रति, खामियाजा भुगतना पड़ा प्रधानमंत्री मोदी के रूट को

नाराजगी दिल्ली पुलिस के प्रति, खामियाजा भुगतना पड़ा प्रधानमंत्री मोदी के रूट को
– दिल्ली कैंट इलाके में हुई थी हत्या
– नाराज परिजन शव लेकर पीएम रूट पर धरने पर बैठे
– पुलिस अधिकारियों के समझाने पर भी नहीं माने
– ऐन मौके पर रूट में किया गया बदलाव
नई दिल्ली
दिल्ली पुलिस के खिलाफ गुस्से का असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूट पर पड़ा। आलम यह रहा कि पुलिस ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए ऐन मौके पर प्रधानमंत्री के रूट में परिवर्तन कर दिया। खैर प्रधानमंत्री का काफिला तो बिना स्र्के रेसकोर्स तक पहुंच गया लेकिन अब यह मामला पुलिस मुख्यालय से गृहमंत्रालय तक पहुंच गया है। गृहमंत्रालय ने इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली पुलिस से स्पष्टीकरण भी मांगा है।
सूत्रों के अनुसार यह मामला शनिवार अपराह्न का है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रूट लगा हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू-कश्मीर स्थित किश्तवाड़ से दिल्ली लौट रहे थे और उनका रूट एयरपोर्ट से रेसकोर्स के लिए लगाया गया था। अपराह्न लगभग साढ़े तीन बजे दिल्ली कैंट के झरेड़ा गांव के निवासी राकेश के शव को पोस्टमार्टम के बाद एम्स अस्पताल से वापस ले जा रहे थे। राकेश की हत्या की गई थी। राकेश के परिजन पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थे। उन्हें यह मालूम हुआ कि कुछ ही देर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला पालम टंकी के पास से गुजरने वाला है। अपनी बात प्रधानमंत्री तक पहुंचाने के इरादे से राकेश के परिजन पालम टंकी के पास शव को लेकर धरने पर बैठ गए। लोगों के धरने पर बैठने की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस में हड़कंप मच गया। तुरंत ही दक्षिण-पश्चिम जिला की डीसीपी सुमन गोयल समेत अन्य आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। जैसे जैसे प्रधानमंत्री के आने का समय नजदीक आ रहा था, वैसे वैसे पुलिस अधिकारियों की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। लोगों को समझाने का भरस्क प्रयास किया गया लेकिन वे मानने को तैयार नहीं हुए। जब यह स्पष्ट हो गया कि नाराज लोग आसानी से हटने वाले नहीं हैं तो इस बात की जानकारी यातायात पुलिस, एसपीजी व दिल्ली पुलिस के पीएम सेक्युरिटी सेल को दे दी गई।
रूट बदलने का लिया गया फैसला
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए तीन रूट लगाए जाते हैं। ए,बी व सी। शनिवार को पहले उन्हें ए रूट से लाना था, जिसके तहत उनका काफिला पालम टंकी से होता हुआ परेड ग्राउंट दिल्ली कैंट से होकर रेसकोर्स की तरफ बढ़ता। लेकिन लोग ए रूट पर धरने पर बैठे थे। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी के बाद भी जनता का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा था। ऐन मौके पर प्रधानमंत्री को बी रूट से ले जाने का फैसला लिया गया। तुरंत ही एसपीजी, यातायात पुलिस व दिल्ली पुलिस के पीएम सेल को इसकी जानकारी दी गई। जिसके बाद प्रधानमंत्री को झरेड़ा गांव के बाहर से निकाला गया। जब प्रधानमंत्री का रूट बिना किसी अवरोध से दिल्ली कैंट इलाके से निकल गया तो दिल्ली पुलिस ने राहत की सांस ली। वहीं शाम लगभग साढ़े छह बजे धरने पर बैठे लोग पुलिस अधिकारियों के आश्वासन के बाद वहां से हटने को तैयार हुए।
धरने पर बैठने का कारण
परिजनों में नाराजगी इस बात को लेकर थी कि 50 हजार के इनामी बदमाश गौरव कोली ने 19 नवंबर की रात को अपने साथियों के साथ मिलकर सरेआम राकेश व कुछ अन्य लोगों पर चाकू व हथियारों से हमला किया था। इस हमले में राकेश समेत पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इन सभी को एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पीड़ित पक्ष ने गौरव व उसके साथियों का नाम पुलिस को बताया था लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। वे बस कार्रवाई करने की बात कहते रहे।