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A Letter to Punjab’s Voters by Prashant Bhushan and Yogendra Yadav

A Letter to Punjab's Voters by Prashant Bhushan and Yogendra Yadav

A Letter to Punjab’s Voters by Prashant Bhushan and Yogendra Yadav

New Delhi: Today, Prashant Bhushan and Yogendra Yadav, Leaders of Swaraj Abhyan wrote a letter addressing the voters of Punjab in a bid to to take the voters of Punjab through several avenues of this election. In this letter they mentioned the adverse effects of the ruling Akali Party, Congress’s corruption and especially the anarchy that can be caused precisely if Aam Admi party comes to the power.

Here’s the highlights of their letter :-

 

*प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव की चिठ्ठी पंजाबियों के नाम:*

प्यारे पंजाबवासियो,

ये चिठ्ठी पंजाब के दो हमदर्दों की तरफ से है। हमारी पैदाइश और रिहाइश पंजाब की नहीं है। लेकिन हम दोनों का पंजाब से रिश्ता है। योगेंद्र पंजाबियों के बीच गंगानगर में बड़ा हुआ, खालसा स्कूल और खालसा कॉलेज में पढ़ा और फिर पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में पढ़ाया। प्रशांत ने पंजाबी सिख परिवार में शादी की है। हम दोनों सन 1984 के कत्लेआम के खिलाफ खड़े हुए।  प्रशांत उस टीम में था जिसने दिल्ली के कत्लेआम का सच देश के सामने रखा। पंजाब के हमदर्द होने के नाते हमारा फ़र्ज़ बनता है कि आपके सामने पूरा सच रखें — बिना मोह, बिना खुंदक के। शुभचिंतक का फ़र्ज़ है कि वो सिर्फ दिल खुश करने वाली बातें न कहे। एक सच्चा दोस्त जरूरत पड़ने पर ऐसी बात भी कहता है जो उस वक्त सुनने में अच्छी नहीं लगती।

आज पंजाब एक चौराहे पर खड़ा है। चुनाव है लेकिन चुनने लायक कोई पार्टी नहीं है। लुटेरों से बचने के लिए जनता से पुराने चोर और नए ठग के बीच चुनने को कहा जा रहा है। इस चौराहे पर एक रास्ता है जो पंजाब को वापिस अकाली-बीजेपी सरकार की तरफ ले जाता है। इस रास्ते को पंजाबी अवाम पहले ही ख़ारिज कर चुका है। बादल परिवार ने पिछले दस सालों में पंजाब का सत्यानाश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एक ज़माने में सारे देश को रास्ता दिखाने वाले पंजाब में आज खेती में तरक्की का रास्ता बंद हो गया है। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। रोजगार है नहीं। उद्योग पंजाब छोड़ कर जा रहे हैं। पंजाब कर्ज में डूबा है। पिछले दस सालों में इन समस्याओं को सुलझाने की बजाय अकालियों ने पंजाब को लूटा है। सरकार का पैसा लूटा है और केबल, बस और बजरी के बिज़नेस के बहाने जनता का पैसा लूटा है। और इसके बदले में जनता को दिया है नशा, पूरी एक पीढ़ी की बरबादी। ऊपर से नीचे तक पंजाब ने इतनी धक्केशाही कभी नहीं देखी। इसलिए इस चुनाव में पहला और सबसे बड़ा फ़र्ज़ बनता है किसी भी हालत में अकाली-बीजेपी गठबंधन को हराना।

दूसरा रास्ता अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार का है। इसी सरकार से दुखी आकर दस साल पहले पंजाब ने अकालियों को वोट दिया था। आज भी इस पार्टी के पास कोरे वादों और भड़काऊ बातों के सिवा कुछ नहीं है। पंजाब की खेती, उद्योग और रोजगार के संकट से निपटने का कोई नक्शा कांग्रेस पार्टी के पास नहीं है। खुद कर्ज में डूबी पंजाब सरकार अपने किसान की कर्जा माफ़ी के लिए पैसा कहाँ से लायेगी, इसका कोई जवाब नहीं है। कांग्रेस के भ्रष्टाचार के किस्से किसे नहीं पता? पंजाब के लोग 1984 को भी नहीं भूले हैं। उस पर पर्दा डालने के लिए अब SYL की नींव डालने वाले अमरिंदर सिंह पानी के सवाल पर पंजाब के किसान को भड़काने में लगे हैं। ऐसी कांग्रेस को वोट डालना तो पंजाब की हार होगी।

ढाई साल पहले पंजाब ने एक तीसरा रास्ता देखा था। इन दोनों पार्टियों से तंग आये पंजाब के वोटर को आम आदमी पार्टी ने बदलाव की एक नयी आस दिखाई थी। हम भी उस वक्त आम आदमी पार्टी के साथ थे। हमने भी आपसे झाड़ू को वोट देने की अपील की थी। पंजाब ने इस बदलाव को बाहें खोलकर स्वीकार किया और चार एम.पी. जिताये। आज भी कुछ लोग सोचते हैं कि झाड़ू पंजाब में कुछ बड़ा बदलाव लाएगी। हम इसकी सच्चाई अंदर से जानते हैं इसलिए हमारा फ़र्ज़ बनता है कि इस पार्टी की हकीकत भी आपको बताएं।

सच ये है कि आम आदमी पार्टी को जो जितना दूर से देखता है उसे उतनी ही खूबसूरत लगती है। लेकिन हमने अंदर से देखा कि ये झाड़ू खुद बहुत गन्दी हो चुकी है। 2014 के बाद इस पार्टी ने चुनाव जीतने के लालच में कांग्रेस-बीजेपी के लोगों, दागदार नेताओं और पैसे वाली आसामियों को टिकट बांटे। जब हम दोनों ने इसका विरोध किया तो हमें पार्टी से निकाल दिया गया। पार्टी के लोकपाल एडमिरल रामदास को भी हटा दिया गया। सच बोलने पर डा. धर्मवीर गाँधी जैसे ईमानदार नेता को भी किनारे कर दिया गया। दिल्ली दरबार के खिलाफ आवाज उठाने वाले स. सुच्चा सिंह छोटेपुर जैसे नेताओं को झूठे इलज़ाम लगाकर बाहर किया गया।

हमने सोचा कि चलो हमारे साथ जो भी किया, कम से कम दिल्ली में एक ठीक सरकार चला दें। जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की 49 दिन की सरकार आई थी तो भ्रष्टाचार रुका था। 2015 की शानदार सफलता के बाद दिल्ली सरकार ने बिजली के दाम कम किये। लेकिन उसके बाद से आम आदमी पार्टी की सरकार ने वही उलटे काम किये जो बाकी सरकारें करती हैं:

वादा किया था नशामुक्त दिल्ली का, लेकिन सत्ता में आने के बाद 399 नए ठेके खोल दिए। गुरुतेग बहादुर के शहीदी दिवस समेत कई नशामुक्त “ड्राई डे” पर इस सरकार ने दारू की बिक्री खोल दी।

वोट लेने के लिए दलितों का नाम लिया, लेकिन 70 हज़ार दलित बच्चों की स्कॉलरशिप काट दी। बजट में  दलित के लिए जरुरी मद में 2,050 करोड़ की कटौती की।

लोकपाल के नाम पर चुनाव जीता था, और अपने ही कानून से उस लोकपाल की हत्या कर दी। स्वराज कानून आज तक नहीं बना।

सरकार बनने के कुछ हफ्ते में ही इस पार्टी के MLA और मंत्रियों के बारे में भी वैसी ही शिकायत आने लगी जैसी बाकि पार्टियों के बारे में। छह मंत्रियों में ​एक मंत्री फ़र्ज़ी डिग्री में पकड़ा गया, दूसरा भ्रष्टाचार में बर्खास्त हुआ, तीसरा औरतों से नाजायज़ सम्बन्ध के चलते जेल गया।

इसलिए दिल्ली की जनता इनसे बुरी तरह परेशान हो चुकी है। दिल्ली में जो हमसे मिलता है, वो पूछता है कि आपने ऐसे लोगों का समर्थन क्यों किया था। कहीं ऐसा तो नहीं कि एक साल बाद पंजाब के लोग भी यही कहते हुए मिलेंगे? फैसला आपको करना है। लेकिन अपनी राय बनाने से पहले अपने आप से कुछ सवाल पूछ लेना:

पंजाब में आप के पुराने और सच्चे वालंटियर में से कितनो को टिकट मिला? अकाली-बीजेपी, कांग्रेस के नेताओं और पैसे वालों को टिकट देने वाली पार्टी बेईमानो के खिलाफ कैसे लड़ेगी? जो पार्टी अभी से पैसा लेकर टिकट बेच रही हो वो सरकार बनाने के बाद क्या-क्या बेचेगी? जो पार्टी सिर्फ ढाई साल में इतनी गिर गयी है वो अगले पांच साल में कहाँ पंहुचेगी? जो पार्टी भरी तिजोरी वाली छोटी सी दिल्ली में सरकार नहीं संभाल पायी वो खाली तिजोरी वाले पंजाब में सरकार चला पायेगी? आपको सरकार चाहिए या हर रोज का ड्रामा?
आम आदमी पार्टी ईमानदारी से मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित क्यों नहीं करती? चोरी-छुपे केजरीवाल का नाम क्यों चला रही है? जो केजरीवाल 70 में के 67 सीट देने वाली दिल्ली का सच्चा न हो सका, वो चुनाव के बाद पंजाब का सच्चा रहेगा? या दो साल बाद हरियाणा में वोट लेने के लिए पंजाब के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर देगा?

इस चौराहे पर यही पंजाब की दुविधा है। पंजाब बदलाव के लिए तैयार है, लेकिन उसके काबिल कोई पार्टी नहीं है। अकाली-बीजेपी और कांग्रेस का मतलब कोई बदलाव नहीं, और आम आदमी पार्टी का मतलब बदलाव का रास्ता ही बंद। तो ऐसे में क्या करें? कुछ लोग कहेंगे कि बड़े चोर से तो छोटा चोर अच्छा है। लेकिन जो चोर पुलिस की वर्दी पहन के खड़ा हो वो तो और भी ज्यादा खतरनाक होता है।

आज पंजाब को एक चौथा रास्ता चाहिए। एक रास्ता जिसमे बदलाव की गुंजाईश को बचा कर रखा जा सके। आज ये रास्ता कोई पार्टी नहीं दे पा रही है। आज ये रास्ता जनता दिखाएगी। इस चुनाव में ऐसी कई छोटी पार्टियां, संगठन और उम्मीदवार भी खड़े हैं जो सच्चे बदलाव के हक़ में हैं। वो अपने दम पर सरकार नहीं बना सकते, शायद चुनाव भी नहीं जीत पाएंगे, लेकिन वो पंजाब की उम्मीद को बचा कर रख सकते हैं। इसलिए हम आपसे अपील करते हैं कि किसी भी हालात में अकाली-बीजेपी को वोट न डालें। जहाँ तक हो सके भ्रष्ट कांग्रेस और पथभ्रष्ट आम आदमी पार्टी को छोड़कर ऐसे उम्मीदवारों और पार्टियों को वोट दें जो पंजाब में बदलाव की गुंजाईश बनाये रखें। सत्ता के लिए हर सौदा करने वाली इन तीनों पार्टियों के अलावा बेहतर उम्मीदवार को वोट देना पंजाब के भविष्य के हित में है , क्योंकि वह सत्ता के लोभियों को  पंजाब की जनता का संदेश होगा कि वे सत्ता के लिए मर्यादा को न छोड़ें ।

पंजाब में जो बदलाव की हवा शुरू हुई है वो अब रुकने वाली नहीं है। ये चुनाव उसकी आखिरी पायदान नहीं है। इस चुनाव के बाद पंजाब में सच्चे बदलाव की असली ताकत खड़ी होगी। पंजाब ने बार-बार देश को रास्ता दिखाया है। हमें उम्मीद है इस बार भी पंजाब देश को निराश नहीं करेगा।

अगर हमारी कोई बात आपको आज अच्छी न लगे तो बुरा न मानना।  एक साल बाद हमारी चिठ्ठी को दुबारा पढ़ना। फिर फैसला करना कि हमारी बात गलत थी क्या।

आपके
प्रशांत भूषण                                       योगेंद्र यादव
अध्यक्ष, स्वराज अभियान                      अध्यक्ष, स्वराज इंडिया